मंगलवार, 18 सितंबर 2007

Bhrastaachaar ke khilaaf...

आओ बहमन, आओ ठाकुर,
आओ कोली और कलवार,
लाला जी तुम भी आ जाओ,
आओ भंगी और चमार...
अलग-अलग है जात हमारी,
एक लहू हम सब का है;
और एक है शत्रु हमारा: शेषनाग-सा भ्रष्टाचार....!

आशा की कश्ती में छेदा
डगमग नइया बीच मझार,
रक्षक ही भक्षक बन बैठा
व्यापा चहुँ दिश हाहाकार;
डाकू सारे नेता बन गए
सो मत जाना पहरेदार...!!
आओ बहमन, आओ ठाकुर......



To be completed later....

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

waah is the first word and the next is....bach kar...kabhi kabhi kuch acche kam bhi(vaise aksar hi)nuksan kar jate han.
ABOUT THESE LINES:as described swapnadarshi....starry lines,
ABOUT RECTION:ab apne liye morcha dekhne ko taiyar ho jaiye han theek hai aap ne sabko bula kar ladne ke liye kaha par aap ne woh shabd(c#####)ka istemal kar ke shayad (I don't know) musibat mol le li

durgesh ने कहा…

प्रिय भाई!
हमारा डर ही तो हमें कमजोर और भ्रष्टाचारियों को मजबूत करता है...
लगता है मैं अकेला नहीं हूँ...