मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

हम क्यूं छले जाते हैं...!

सारे रिश्ते झूठे हैं,
व्यर्थ सब नाते हैं,
जानते हुए भी क्यूं
हम
बार-बार छले जाते हैं...?

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