सोमवार, 2 फ़रवरी 2009

शापित शिला...!


शापित शिला-सा मैं,
युग-युग से बैठा
तुम्हारी प्रतीक्षा में मेरे राम...
पर,
तुम्हें नहीं आना था
और तुम नहीं आए...!

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